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राजनैतिक खबरें प्रेसवार्ता में आपका सवागत है

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09
November
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जातीय समीकरणों व जजपाई सोच में फंसा मंत्रीमंडल विस्तार

सिरसा(प्रेसवार्ता)। हरियाणा में भाजपा ने तालमेल कर अपनी दूसरी पारी की शुरूआत तो कर दी है, लेकिन मंत्रीमंडल का विस्तार गले की फांस बन गया है। 90 सदस्यों वाली हरियाणा विधानसभा में 14 में से 3 जजपा और दो निर्दलीय विधायकों को मंत्री पद देने का फोक्स भाजपा बनाकर चल रही है, जिसमें जातीय व क्षेत्रीय संतुलन को तव्वजों दी जा सकती है। प्रदेश के सातों निर्दलीय विधायक भाजपा को समर्थन दे चुके है और वह भी सम्मानजनक भागीदारी का स्वपन संजोये हुए है। इसके अतिरिक्त सभी निर्दलीय विधायकों को बोर्ड व निगमों में एडजस्ट किया जा सकता है। भाजपा का विकास रहेगा कि जजपा और निर्दलीय विधायकों को बगैर नाराज किए पांच वर्ष तक दूसरी पारी खेली जाए। सूत्रों के मुताबिक जजपा चार मंत्री पद मांग रही है। यदि भाजपा को जजपा के राजनीतिक दवाब में निर्णय लेना पड़ा, तो डिप्टी स्पीकर का पद भी जजपा को दिया जा सकता है। भाजपा की ओर से अनिल विज, सुभाष सुधा, डॉ.कमल गुप्ता, सीमा त्रिखा, कमलेश ढांडा, बनवारीलाल, रणबीर गंगवा का नाम चर्चा में है, जबकि जजपा देवेंद्र बबली, ईश्वर सिंह, अनूप धानक, रामकुमार गौत्तम के अतिरिक्त निर्दलीय रणजीत सिंह, सोमवीर सांगवान को मंत्रीमंडल में स्थान देने पर मंथन चल रहा है। भाजपा का एक बड़ा वर्ग कैप्टन अभिमन्यु को पराजित करने वाले जजपा के राम कुमार गौत्तम तथा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला को चुनावी मात देने वाले देवेंद्र बबली की सत्ता में भागीदारी का पक्षधर नहीं है। संभावना तो यह भी है कि गौत्तम व बबली की सत्ता से भागीदारी से भाजपा में बगावती चिंगारी भडक सकती है। गठबंधनीय मनोहर सरकार को लेकर जजपाई तो उत्साहित है, मगर ज्यादातर भाजपाईयों में निराशा देखी जा सकती है। भाजपाई संगठन व संघ चाहता है कि तालमेल के बावजूद दवाब की राजनीति से परहेज रखा जाए और जजपा के बढ़ रहे जनाधार पर अंकुश लगाने के लिए डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के गृह जिला सिरसा में वहीं से विजयी और दुष्यंत चौटाला के दादा निर्दलीय विधायक रणजीत सिंह को महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाए, जो भाजपाईयों की उम्मीदों पर खरा उतर पाए। इनैलो के गढ़ कहे जाने वाले सिरसा जिला में एक भी विधायक नहीं है। ऐसी राजनीतिक परिस्थितियों में रणजीत सिंह भाजपा-जजपा सरकार के लिए काफी लाभदायक सिद्ध हो सकते है। टिकट वितरण प्रक्रिया में राजनीतिक झटका खा चुकी हरियाणा भाजपा मंत्रीमंडल विस्तार को लेकर काफी गंभीर है, क्योंकि गठबंधनीय सरकार में भाजपाईयों तथा जजपा की उम्मीदों पर खरा उतरना किसी अग्रि परीक्षा से कम नहीं आंका जा सकता। वर्तमान में भाजपा व जजपा के विधायकों की नजरे मंत्रीमंडल विस्तार पर टिकी हुई है और ज्यादातर विधायक लॉबिंग में व्यस्त है, जबकि जातीय तथा क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने में भाजपा के पसीने छूट रहे है।

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17
November
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भाजपा की दूसरी पारी पडेगी भाजपा पर भारी

सिरसा (प्रैसवार्ता ) सत्ता सुख के लिए भाजपा हरियाणा ने अपनी दूसरी पारी के लिए जजपा से गठबंधन करके राज्य के भाजपाइयों की बेचैनी बढा दी है,क्योंकि पहली पारी में जनभावनाओं पर खरा न उतरने में विफल रही भाजपा को विधानसभा चुनाव में हरियाणा के मतदाताओं ने आईना दिखाते हुए जजपा से तालमेल करने पर मजबूर कर दिया है। भाजपा जजपा की गठबंधनीय सरकार को लेकर राज्य की राजनीति क्यासों की चपेट में है। गठबंधनीय गांठ कब तक मजबूती पकडे रखेगी, इस प्रश्न का उत्तर प्रश्न के गर्भ में है,मगर राज्य के राजनीतिक जादूगरों ने गांठ खोलने के प्रयास शुरू कर दिये हैं। गठबंधनीय सरकार को लेकर सबसे बडी बेचैनी भाजपाइयों में है,जो उनके दिग्गजों को राजनीतिक पटकनी देने वालों की चौधर को कैसे सहन करें ? दोनों दलों का प्रयास रहेगा कि अपनी अपनी पार्टी का जनाधार बढाया जाये। प्रश्न यह उठता है कि राज्य में विधानसभा चुनाव में एक दूसरे से राजनीतिक मतभेद बनाने वाले भाजपाई व जजपाई एक ही मंच पर नजर आयेंगे, क्योंकि गठबंधन सत्ता सुख के लिए हुआ है,न कि भाजपा जजपा के समर्थकों के लिए। हरियाणा के मतदाताओं ने भाजपा शासन से नाराजगी के चलते जजपा पर विश्वास बनाया था,जिसपर जजपा ने जन विश्वास को ही विश्वास योग्य नहीं समझा। भाजपाई दिग्गजों की सियासी लुढकन और जजपाईयों की चौधर से राज्य के भाजपाइयों को गहरा झटका लगा है,जो भाजपाई जनाधार कैसे बढा पायेगा, इससे भाजपा का शीर्ष नेतृत्व चिंतित है। राजनीतिक पंडित मानते है कि भाजपा की दूसरी पारी भाजपाइयों पर भारी रहेगी और भाजपाई जनाधार धीरे-धीरे खिसकेगा।

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17
November
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इनैलो के गढ मे सेंधमारी से विफल रही भाजपा : मंथन शुरू

सिरसा (प्रैसवार्ता) लोकसभा चुनाव में इनैलो के गढ कहे जाने वाले हरियाणा राज्य के जिला सिरसा के पांचों विधानसभा क्षेत्रों में भारी बढत लेने वाली भाजपा को मात्र पांच मास बाद हुए विधानसभा चुनाव में मतदाताओं द्वारा दिखाये गये आईने ने शीर्ष नेतृत्व को मंथन पर मजबूर कर दिया है। इनैलो के इस लडखडाते गढ में आये बिखराव के बावजूद भी भाजपा की सेंधमारी का विफल रहना कई सवालिया निशान छोड गया है। इनैलो से अलग होकर बनी जजपा का भी इस जिले में कोई विशेष असर देखने को नहीं मिला। इनैलो अपने ही गढ में एक सीट बचाने में सफल रही है,जबकि दो पर कांंग्रेस, एक पर हलोपा तथा एक पर निर्दलीय ने विजयी परचम फहराया है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का फोक्स शहरी क्षेत्रों में हुए कम मतदान और टिकट से वंचित रहे चेहरों तथा उनकी चुनाव में रही भूमिका पर है। सूत्रों के मुताबिक मनोहर सरकार में स्थानीय नेताओं को तवज्जो न देने से उनके प्रति लोगों की नाराजगी इस चुनाव में देखने को मिली है। जिला सिरसा के दो विधायको का दलबदल करवा कर भाजपा उम्मीदवार बनाना एक राजनीतिक भूल कही जा सकती है,क्योंकि यह दलबदलू अपने क्षेत्रों में मतदाताओं की उम्मीदों पर खरा उतरने में विफल रहे हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल को दिया गया "फ्री हैंड" उनके आत्मविश्वास, हठकर्मी और टिकट वितरण में चूक भाजपा पर भारी पडी है। मनोहर लाल को उम्मीद थी कि लोकसभा चुनाव परिणाम की तर्ज पर वह जीत हासिल करेंगे। इसलिए उन्होंने पुराने व निष्ठावान दिग्गजों ,जातीय समीकरणों को दरकिनार कर ऐसे चेहरो को चुनावी समर में उतारा, जो मतदाताओं पर विश्वास नहीं बना पाये। टिकट वितरण में हुई चूक से जिला सिरसा में "कमल का फूल" खिल नहीं सका।

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