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17
November

इनैलो के गढ मे सेंधमारी से विफल रही भाजपा : मंथन शुरू

सिरसा (प्रैसवार्ता) लोकसभा चुनाव में इनैलो के गढ कहे जाने वाले हरियाणा राज्य के जिला सिरसा के पांचों विधानसभा क्षेत्रों में भारी बढत लेने वाली भाजपा को मात्र पांच मास बाद हुए विधानसभा चुनाव में मतदाताओं द्वारा दिखाये गये आईने ने शीर्ष नेतृत्व को मंथन पर मजबूर कर दिया है। इनैलो के इस लडखडाते गढ में आये बिखराव के बावजूद भी भाजपा की सेंधमारी का विफल रहना कई सवालिया निशान छोड गया है। इनैलो से अलग होकर बनी जजपा का भी इस जिले में कोई विशेष असर देखने को नहीं मिला। इनैलो अपने ही गढ में एक सीट बचाने में सफल रही है,जबकि दो पर कांंग्रेस, एक पर हलोपा तथा एक पर निर्दलीय ने विजयी परचम फहराया है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का फोक्स शहरी क्षेत्रों में हुए कम मतदान और टिकट से वंचित रहे चेहरों तथा उनकी चुनाव में रही भूमिका पर है। सूत्रों के मुताबिक मनोहर सरकार में स्थानीय नेताओं को तवज्जो न देने से उनके प्रति लोगों की नाराजगी इस चुनाव में देखने को मिली है। जिला सिरसा के दो विधायको का दलबदल करवा कर भाजपा उम्मीदवार बनाना एक राजनीतिक भूल कही जा सकती है,क्योंकि यह दलबदलू अपने क्षेत्रों में मतदाताओं की उम्मीदों पर खरा उतरने में विफल रहे हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल को दिया गया "फ्री हैंड" उनके आत्मविश्वास, हठकर्मी और टिकट वितरण में चूक भाजपा पर भारी पडी है। मनोहर लाल को उम्मीद थी कि लोकसभा चुनाव परिणाम की तर्ज पर वह जीत हासिल करेंगे। इसलिए उन्होंने पुराने व निष्ठावान दिग्गजों ,जातीय समीकरणों को दरकिनार कर ऐसे चेहरो को चुनावी समर में उतारा, जो मतदाताओं पर विश्वास नहीं बना पाये। टिकट वितरण में हुई चूक से जिला सिरसा में "कमल का फूल" खिल नहीं सका।