देधुर या देवीधूरा नामक स्थान हिमाचल राज्य उत्तरांचल के चंपावत में स्थित हैं । वाराही देवी का ये धाम एक प्राचीन धार्मिक नगर हैं। कुमांऊनी शब्द देवीधूरा का मतलब हैं देवी का शिखर क्षेत्र। 1986 में लिखे गए हिमालियन गजेटियर में एटकिंसन ने बताया कि देवीधूरा में एक डाक बंगला और एक दुकान मात्र थी यपि यह धार्मिक भावनाओं का केन्द्र तब भी था। देवीधूरा काली कमाऊं या कुमूं परगने की पश्चिमी सीमा पर असीचालसी पट्टी में सबसे ऊंचे पर्वत में स्थित हैं।
हिमालयन गजेटियर लेखक एटकिन्सन ने लिखा हैं कि हिन्दूओं को भारी संख्या के लिए कुमाऊं वैसा ही धार्मिक स्थान हैं, जैसा कि ईसाईयों के लिए फिलिस्तीन। जागेश्वर, पूंर्णागिरी, बागेश्वर, कटारमल सूर्य मंदिर, बैजनाथ, द्वाराहाट कुमाऊं के मुख्य तीर्थ स्थल हैं। यहां के लोग शिव और शक्ति के उपासक रहे हैं। इस संप्रदाय में वाराही को भगवान विष्णु के विशेषणों में अर्थात् हाथों में शंख, चक्र, हल, मूसल, दंड, ढ़ाल, खडग, फॉस व अंकुश के लिए तथा दो हाथ वरद और अभय मुद्रा में दिखाया गया हैं। शेषनाग, कूर्म या गरूड़ उनके दो वाहन बताए हैं तथा साथ में सूकर बैठा दिखाया गया हैं। अभय मुद्रा में देवी ने दाएं हाथ की हथेली सामने दिखाई हैं, जिसका मतलब हैं ' मैं तुम्हारी रक्षा करूंगी' और वरन मुद्रा में बाएं हाथ की हथेली दिखाई हैं जिसमें ऊंगलियां नीचे की और हैं। इस मुद्रा से देवी कहती हैं कि 'मैं तुम्हारी कामनाएं पूरी करूंगी'।
देवीधूरा में अनेको मंदिर हैं, जो विभिन्न देवताओं को समर्पित हैं। लेकिन यहां की मुख्य अराध्य देवी मां वराही हैं जो निमांषी हैं। वाराही को दो पूजास्थल समर्पित हैं। यानि असीम श्रद्धा वाले प्राचीन गुफा मंदिर की गुहा्रेश्वरी तथा सिंहासन डोला के अंदर सदैव गुप्त रहने वाली गुप्तेश्वरी। वाराही देवी की मुर्ति तांबे के संदूक अर्थात् सिंहासन डोला में स्थित हैं। इसे सदैव गुप्त रखा जाता हैं अर्थात् देवी के दर्शन का आदेश किसी को नहीं हैं।
करीब 40 साल पहले तक सावन में देवीधूरा का मेला एक महीने तक चलता था। इस दौरान आसापास के लगभग 25 मील परिधि के गांववाले यहां जमावड़ा लगता था। स्थानीय लोगों को इस मेले का बेसब्री से इंतजार रहता था। आजकल यह मेला श्रावण की एकादशी से लेकर जन्माष्टमी तक चलता हैं। अठवार, बग्वाल, जमान अर्थात् रक्षा बंधन के एक दिन पहले से एक दिन बाद तक तीन मुख्य मेला दिवस हैं।
कैसे पहुंचें
देवीधूरा के सबसे नजदीक स्थित एयरपोर्ट पंतनगर हैं, जो 120 किलोमीटर की दूरी पर हैं। यहां पहुंचने के लिए टनकपुर और काठगोदाम दो निकटतम रेलवे स्टेशन हैं। इन दो जगहों से देवीधूरा के लिए सड़क यातायात सुलभ हैं। (प्रैसवार्ता)
