मां का प्यार मिलता है नसीब वालों को, दुनियां में नहीं इसका बाजार होता
ये रिश्ता है रब की रहमतों का, हर रिश्ता नहीं इतना वफादार होता
उस घर से अच्छा शमशान होता, जिस घर में मां का सत्कार नहीं होता
7 जन्मों तक नहीं कर्ज उतार होता, पुत्र मां का इतना कर्जदार होता
करनी सीख लो इज्जत मां की, मां के चरणों में रब का दीदार होता।(प्रैसवार्ता)


