जयपुर(विनीता शर्मा)। जय श्री राम बोलने वाले बालीवुड के सबसे ज्यादा लोकप्रिय कहे जाने और कुश्ती के बेताज बादशाह अमृतसर के पंजाबी पुत्र जानेमाने पहलवान दारा सिंह अब किसी फिल्म या पंजाबी हिंदी टी वी नाटक या विज्ञापन आदि में जानदार आवाज के धनी कभी भुई ना तो देखे ना ही सुने जा सकेंगे। देश के जानेमाने हंसमुख और मशहूर अभिनेता व रूस्तमे हिन्द पहलवान दारा सिंह ने वीरवार की शाम चार बजे मुंबई के विले पार्ले स्थित शवदाह केंद्र में अंतिम संस्कार की रस्म प्राप्त की !इस अवसर पर अंतिम संस्कार में अनेकों फिल्मी हस्तियां और मंच कलाकार समाजसेवी हस्तियां उपस्थित थी। दारा सिंह ने वीरवार सवेरे अपनी बीमारी के बाद अपने जूहु स्थित निवस स्थान में निधन हुआ। इस से पूर्व दार जी अस्पताल में भी उपचाराधीन रहे।
दारा सिंह के बिग बास विजेता बेटा और बालीवुड अभिनेता बिंदु दारा सिंह ने अपने पिता के निधन के बाद नम आँखें और गमगीन लहजे में कहा, ''फरिश्ता चला गया और अब वह एक सितारे की तरह आकाश में चमकेगा।'' अस्पताल में दारा सिंह को डाइलिसिस पर रखा हुआ था। दुनिया के सबसे बड़े ग्रन्थ श्री रामायण के बने टी वी धारावाहिक में भगवान हनुमान जी का रोल अदा करने वाले डील डौल वाले दारा सिंह को सात जुलाई को हार्ट अटैक हुआ था। तुरंत उनको मुंबई स्थित धीरूभाई अंबानी कोकिला बेन अस्पताल में अदमित करवाया गया था, पर उनकी दशा गम्भीर ही रही। उक्त हस्पताल में डाक्टरों ने खूब मुशाक्त की पर अंत में बेबस डाक्टरों ने दारा जी को ब्रेन डेड एनाउंस कर डाला। यहीं नहीं बुधवार शाम को ही दारा को घर वापस लाया गया था। राम भगत हनुमान कहे जाने वाले दारा सिंह की भी हिन्दुस्तानी की तरह अपने घर परिवार में अंतिम सांस लेने की हार्दिक इच्छा पुरी हुई।
दारा जी का हरे भरे परिवार में उनकी धर्म पत्नी और तीन बेटे व तीन बेटियां हैं। उनके फैमली डाक्टर आर के अग्रवाल ने बताया कि सिंह के अंतिम समय में काफी राहत भरे क्षण गुजरे शायद ये अपने परिजनों का उनके आसपास रहने के कारण हुआ।
1952 में फिल्मों में एंट्री करने वाले देश के रुस्तमे हिंद दारा सिंह ने वतन से दूर, दादा, रूस्तम-ए-बगदाद, शेर दिल, सिकंदर -ए-आजम, राका, मेरा नाम जोकर, मर्द और धरम-करम जैसी कई चर्चित और कामयाब फिल्मों में रोल अदा किये थे। 1980 के दशक में दुनिया भर में सर्वाधिक प्रसारित और लोकप्रिय टीवी धारावाहिक रामायण में दारा जी ने यादगार और शानदार अभिनय करते हुए सियाराम जी के भक्त हनुमान का रोल अदा करके खूब ख्याति पाई थी। दारा सिंह 19 नवंबर 1928 को पंजाब के अमृतसर जिले के धरमूच गांव में सिख जट कुल जन्म था। आपकी मां बलवंत कौर और पिता सूरत सिंह रंधावा थे। आप शुरू से ही सुडौल शरीर के धनी और गम्भीर हंसमुख व्यक्तित्व के धनी थे। स्कूली पढ़ी में दिल कम लगता था। जोर आजमाइश के कामों में ज्यादा रूचि रहती थी। कमजोर साथियों के लिये सदा सबल दारा सिंह मददगार बने रहते थे। दारा सिंह का जाना सब हिन्दुस्तानियों के लिये ही नहीं बल्कि कला मंच सिने जगत और खेल संसार सहित विज्ञापन जगत सब के लिये कभी ना पूरी होने वाली हानि है जिसकी भरपाई अब कभी ना हो पायेगी।
