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भारत में पोर्न देखने के लिए सबसे ज्यादा यूज होता है इंटरनेट, अमेरिकी देखते हैं लाइव टीवी

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Internetइंटरनेट को लेकर कई बार रिपोर्ट आ चुकी है कि भारत दुनिया के उन चंद देशों में शामिल है जहां इंटरनेट के बंद होने की सबसे ज्यादा संभावना है। हाल में आई एक रिपोर्ट ने एक बार फिर भविष्य में हमारे यहां इंटरनेट बंद हो जाने की बात को पुख्ता किया है।
    इसकी मुख्य वजह भारत में इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ग्लोबल आईएसपी) की संख्या घटती हुई संख्या है। भारत में जहां इंटरनेट सर्विस चीन-अमेरिका जैसे कई बड़े देशों की तुलना में काफी महंगी है। वहीं, इसकी सर्विस से लेकर स्पीड तक की स्थिति काफी खराब है।
    इंटरनेट को लेकर भारत की इन स्थितियों के बीच दुनिया के कुछ ऐसे देश हैं जहां, यूजर को इंटरनेट को लेकर पूरी फ्रीडम मिली हुई है। साथ ही यहां स्पीड, क्षमता और रियायती कीमत भी बहुत बेहतर है। साउथ कोरिया में तो इंटरनेट सबसे तेज रफ्तार से चलता है। इतनी कि तीन घंटे की फिल्‍म केवल 20 सेकंड में डाउनलोड हो जाती है।
     बतौर प्लेटफॉर्म इंटरनेट का इस्तेमाल दुनिया भर में अलग-अलग कारणों से किया जाता है। जहां, भारत और कई खाड़ी देशों में इंटरनेट का सबसे ज्यादा इस्तेमाल पोर्न देखने में होता है, वहीं अमेरिका में अधिकतर यूजर्स इंटरनेट को यूज लाइव टीवी देखने के लिए करते हैं।
     इंटनेट की बढ़ती उपयोगिता और इसके महत्व को आज कोई भी नकार नहीं सकता, भले ही काफी लोग इसका दुरुपयोग और गलत आदतों के लिए करते हैं, लेकिन बहुत से लोग और देशों में इसका उपयोग जरूरी और महत्वपूर्ण काम के लिए करते हैं।(साभार)

सेक्स में मर्दों का मिजाज और औरत का हिसाब

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Img1130218022 1 1कई धर्म सेक्स के खुलेपन, सेक्स पर चर्चा और असामान्य सेक्स की इजाजत नहीं देते हैं। इस सबके बावजूद सेक्स के अच्छे और बुरे पक्ष को लेकर कई तरह के शोध हुए हैं। यह सारे शोध धर्म से उलट हैं। हालांकि अब सेक्स में जहां महिलाएं बढ़-चढ़कर भाग लेने लगी हैं वहीं मर्दों का मिजाज भी बदलने लगा है।
मर्दों के मिजाज : ताजा अध्ययन से पता चला कि बिस्तर पर स्त्री और पुरुष बेहद अलग-अलग मानसिकता के होते हैं। एक पुरुष का शरीर यौन उत्तेजना महसूस करने पर हमेशा उसकी प्रतिक्रिया तेजी से देता है जबकि ऐसी त्वरित प्रतिक्रिया कुछ ही महिलाओं में होती है।
    शोध के अनुसार कुछ महिलाएं शारीरिक गतिविधियों के बावजूद उत्तेजित नहीं होतीं और कुछ गतिविधियों के बगैर ही उत्तेजित हो जाती हैं जबकि पुरुष मानसिक और शारीरिक प्रतिक्रियाओं में समान रूप से उत्तेजित पाए गए। इस शोध में दोनों के यौनांगों में खून के बहाव से मापी गई मानसिक प्रतिक्रियाओं से तुलना की गई थी।
    'डेली मेल' की रिपोर्ट के मुताबिक इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने वर्ष 1969 से 2007 के बीच 2500 महिलाओं और 1,900 पुरुषों को शामिल कर किए गए शोधों की श्रृंखलाओं को खंगालकर तथ्य जुटाए थे।(साभार)

कैसे पता करूं कि मेरी होने वाली पत्नी कुंवारी है?

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Img1130211050 1 1प्रश्न : मेरी शादी होने वाली है। सगाई के बाद एकांत में हमारे शारीरिक संबंध भी बन चुके हैं। लेकिन मैंने पहली बार जब उसके साथ सेक्स किया था तो उसकी योनि से खून नहीं निकला था। क्या ऐसा होना जरूरी है? मैने सुना है कि कुंवारी लड़की के साथ प्रथम संभोग में खून निकलता है। कहीं उसके किसी और लड़के से तो संबंध नहीं हैं? मेरी शंका का समाधान करें।

उत्तर : यदि लड़की कुंवारी है तो पहली बार संभोग करते समय योनि से रक्तस्राव होना चाहिए, लेकिन यह प्रत्येक मामले में जरूरी नहीं है। यदि खिलाड़ी है, साइकिल चलाती है या अन्य शारीरिक श्रम करती है तो ऐसी स्थिति में योनि की झिल्ली (हाइमेन) फट सकती है। ऐसी स्थिति में पहली बार संभोग के दौरान रक्त नहीं निकलता।

अगर आपकी पार्टनर स्कूल समय से ही शारिरिक गतिविधियों जैसे खेल-कूद या व्यायाम में सक्रिय रही है तो बहुत संभव है कि प्रथम संभोग में योनि से खून न आए। ऐसे में आप अपने मन से यह शंका पूरी तरह से निकाल दें कि उसके किसी अन्य लड़के से शारीरिक संबंध हो सकते हैं। अगर आपकी पार्टनर आपको धोखा देना चाहे तो आजकल बड़ी आसानी से हाइमेन सर्जरी से कौमार्य को दुबारा पाया जा सकता है।

यदि आप एक-दूसरे को प्यार करते हैं तो निश्चित ही आपको विवाह करना चाहिए और सुख से जीवन बिताएं।(साभार)

देश के गद्दार अफजल को फांसी के मायने

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Afjal GuruAfjal Guruपहले कसाब और अब अफजल गुरू को फांसी मिलने से एक बात साफ हो गई है कि देश की आतंरिक एवं बाह्य सुरक्षा के लिए खतरा बने देश  के दुश्मनो व गद्दारों के लिए देश के अन्दर कोई जगह नही है। अहिंसा परमो धर्म का अनुयायी भारत देश की तरफ आंख उठाने वालो की आंख भी निकाल सकता है। यह इन दोनो देश के दुश्मनो को फांसी देने से साफ हो गया है। हांलाकि भारत ने मुम्बई हमले व भारतीय ससंद पर हमले के आरोपियो को अपने बचाव में कानूनी पैरवी का पूर्ण अवसर प्रदान किया। तभी तो दोनो को फांसी देने में करीब एक दशक का समय लग गया। कसाब और अफजल गुरू को जल्दी फांसी देने के मुद्दे पर जमकर राजनीति भी हुई। संसद में विपक्षी पार्टी भाजपा ने तो इस मुद्दे पर अनेक बार यूपीए सरकार को कटधरे में खडा करने की कोशिश की, परन्तु सरकार विचलित नही हुई और विधिवत रूप से सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा कसाब और अफजल गुरू को फांसी की सजा बरकरार रखने के फैसले के बाद राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजने का भी अवसर दोनो आतंकियों को दिया गया और राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज करने के बाद ही दोनो को फांसी दी गई। ताकि दुनिया का कोई भी देश और देश की आतंरिक जनता यह न कह सके की सरकार ने कानून में बचाव का अवसर उन्हे नही दिया गया। यानि पर्याप्त कानूनी अवसर देने के बाद ही देश के दुश्मनों को फांसी दी गई। हालांकि जिस बर्बता और अमानवीयता के तहत इन आतंकियों ने निर्दोषों का खून बहा और देश की आतंरिक सुरक्षा को खतरा पैदा करने की कोशिश की उनके इस धिनौने अपराध के लिए तो उन्हे तत्काल मौत दे दी जाती तब भी गलत नही होता परन्तु भारत ने चाहे विदेशी अपराधी हो या देश का गद्दार दोनो को उनके कानूनी बचाव का भरपूर अवसर दिया, इसी कारण उन्हे फांसी देने में देरी भी हुई। लेकिन कानून द्वारा सजा घोषित व दया याचिका खारिज होने केे बाद उसका क्रियान्वयन करने में जो तत्परता बरती गई उसके लिए केन्द्र सरकार को शाबाशी मिलनी ही चाहिए। जो लोग फांसी में देरी की बात कर रहे है वह सही है परन्तु इसके लिए पूरी न्याय व्यवस्था को चुस्त दुरूस्त करने की आवश्यकता है। मात्र किसी एक मुकदमें को जल्द से जल्द निपटाने की मांग के बजाए ससंद में न्याय व्यवस्था में शीघ्र, सुलभ व सस्ते न्याय के इन्तजाम की जरूरत है। सभी को याद है 13 दिसम्बर सन 2011 का वह मनहूस दिन जब मुख्य साजिशकर्ता अफजल गुरू की देश के खिलाफ रची गई साजिश कामयाब हो गई और देश की ससंद की रक्षा में लगे हमारे जांबाज पुलिस कर्मी व अन्य कई लोग शहीद हो गए। लेकिन पुलिस की बहादुरी के कारण ससंद के अन्दर आंतकी धुसने में कामयाब नही हुए और देश के कर्णधारों की जान बच गई। साथ ही ससंद भी सुरक्षित रही। पहले जब कसाब को फांसी दी गई और अब अफजल गुरू को फांसी पर लटकाया गया तो इन दुर्दान्त आंतकियों के शिकार शहीदो की आत्मा को जरूर शांति मिली होगी। शहीदो के परिजनो को भी संतोष हुआ है कि उन्हे देर से ही सही परन्तु न्याय मिल गया है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पहले कसाब की दया याचिका खारिज की और अब अफजल गुरू की भी दया याचिका खारिज करके एक इतिहास रच दिया है। क्योकि राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज करने के बाद ही इन आतंकियों को फांसी देने में कामयाबी मिल पाई। दरअसल अफजल गुरू की साजिश संसद को कब्जे में लेकर देश को अपने इशारे पर नचाने की या फिर देश के कर्णधारो के लिए खतरा बन जाने की थी तभी तो एक आतंकवादी ससंद के गेट नम्बर एक तक पहुंच भी गया था परन्तु ससंद के सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान पर खेलकर उस आतंकी को ढेर किया। अगर इन आतंवादियो जो सफेद रंग की अम्बेसडर कार में ससंद में धुसे से थे से गलत साईड में कार को ले जाने की गलती न हुई होती तो शायद देश को शहादत ओर ज्यादा देनी पडती। खैर! जिस तरह से कसाब को गोपनीयता के साथ फांसी दी गई, वही गोपनियता अफजल गुरू को फांसी देने के मामले में भी बरती गई ताकि देश में किसी प्रकार की कोई अशांति न हो। इसी कारण दोनो ही आतंकियों को फांसी देने के बाद जेल परिसर में ही दफनाया गया। लेकिन फिर भी जम्मू कश्मीर में कर्फ्यू के हालात बन गए और वहां कर्फयू लगाना पडा। ऐसा होना दुर्भाग्य ही है। परन्तु जिस तरह से पहले कसाब और अब अफजल गुरू को फांसी देने की कार्यवाही का स्वागत हुआ है। उससे साफ हो गया है कि देश की जनता देश के गद्दारो और देश के दुश्मनो को तत्काल फांसी देने की पक्षधर है। तभी तो प्रायः देश के हर राज्य से कसाब और अफजल गुरू को फांसी दिये जाने का स्वागत हुआ है। केन्द्र सरकार की इस कार्यवाही से उन देश के दुश्मनो को भी सबक मिलेगा जो देश में आंतक फैलाकर देश की एकता और अखण्डता के लिए खतरा बनने के प्रयास में है। महंगाई के कारण जनता के लिए नाराजगी का कारण बनती जा रही यूपीए सरकार का आतंकवादियो को फांसी देने की कार्यवाही से भरोसे का ग्राफ बढ गया है। अब भाजपा के हाथ से भी कसाब व अफजल गुरू को फांसी देने की मांग को लेकर राजनीति करने का अवसर निकल गया है बल्कि कांग्रेस इस मुद्दे पर अब मुखर नजर आएगी और ससंद के अन्दर भी शान के साथ देश के दुश्मनो को फांसी देने की चर्चा कर सकेगी। जो उसके लिए सन 2014 के लोकसभा चुनाव में फायदे का सौदा होगा।(श्रीगोपालनारसन)

विदेशी परम्परा का सम्मान करते रहे भारतीयता का राग आलापने वाले

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Rose Dayचंडीगढ़, 07 फरवरी (आर के विक्रमा शर्मा)। वेलन्टाइन डे यानि विदेशी परम्परा का युवा समाज के लिये पर्व आज यानि कि सात फरवरी से शुरू हो चुका है। शहर के बाजार सब सज धज कर विदेशी पर्व के स्वागत हेतु पलक पावडे  बिछाए हुए हैं। हर दुकान दुल्हन की मकिफ सजी है। दिल को लुभावने वाले गिफ्ट्स का अम्बार लगे हुए हैं। मेल फिमेल यंगस्टर्स के लिए सब कुछ भरा गया है इन गिफ्ट गैलरीज में। पर इस मर्तबा हाथ से बनी चीजें दिल ताजे फूलों के गुलदस्ते और महंगे गिफ्ट्स ज्यादा लोकप्रिय हो रहे हैं। अदिति कलाकृति हब ऑफ़ हाबीज एंड हैंडी क्राफ्ट्स की निदेशिका मोनिका शर्मा आभा ने हमारे संवाददाता को बताया कि उनके पास भी वुडन बेस्ड कंबाइंड हार्ट्स और हार्ट की किरिंग्स आदि की खूब डिमांड की जा रही है। साइज मुताबिक वुडन बेस्ड फोटो हार्ट फेम फ्रेम की खूब डिमांड है। यहीं उनके यहां के बनाये हुए हाथों से बने गिफ्ट्स की गैलरीज में खूब डिमांड बनी है। इन दिनों वाक्य गरीब लडकियों के लिए हाथ का हुनर को चमकाने और कमाने सहित दिखाने का भरपूर अवसर है। इस दफा धार्मिक हेंगिंग पेंटिंग्स राधा कृष्ण जी की खूब बिक्री हुई है और अभी भी ऑर्डर मिलने जारी हैं। लडकियों में इस बार धार्मिक गिफ्ट्स खरीदने की शुरुआत अच्छा संकेत है। इस व्यवसाय में खूब मुनाफा होगा।  उधर हिन्द संग्राम परिषद के युवा राष्ट्रीय महासचिव विष्णु मोहन विक्रांत ने एलान किया कि  देश में नारी समाज के साथ जुल्म सितम की आंधी के चलते और बच्चियों से हो रहे कुकर्मों की बाढ़ के कारण वेलन्टाइन डे  कदापि नहीं मनाएंगे। अगर वाक्य ही युवा दामिनी को सच्ची श्रधान्जली देना चाहते हैं तो विदेशी परम्परा से किनारा करेंगे और इस दिन को नारी समाज की इज्जत करने और उनकी सुरक्षा करने की शपथ लेकर मनाएंगे। चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस के इंस्पेक्टर मलकीत सिंह ने बताया कि युवा खास कर बाइक सवारों  पर पैनी निगाह रखी जायेगी। राइस जादों को लग्जरी गाडिय़ाँ भगाने पर भी नकेल कसी जायेगी ताकि लडकियाँ एक्सीडेंट का शिकार दहशत के चलते न हों । पंजाब यूनिवर्सिटी में भी सिक्योरिटी के पुख्ता इंतजाम किये गये हैं। खबर लिखे जाने तक फुल बेचने वाले दुकानों में रोज फूल और कलियाँ बेचने  में मशगूल हैं। फूलों की कीमतों में भी इजाफा देखा गया। अभी और विक्री होने से  भी फूल विक्रेता इनकार नहीं कर रहे हैं। मार्किटों में चाकलेट डे आठ फरवरी को होने के चलते खूब बिक्री देखी गई है। इस मर्तबा रिकार्ड बिक्री होने की बात कही जा रही है। आज चौक चौराहों पर पुलिस मुस्तैद देखि गई ! कालेजों के बाहर भी तैनाती रही और सख्त तेवर देखे गये।(प्रैसवार्ता)

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